के पश्चिम प्रभाग बन चुका है भ्रष्टाचार का अड्डा आम आदमी खा रहा धक्के, अधिकारी मलाई खाने में व्यस्त
बीएमसी और भ्रष्टाचार एक दूसरे के पर्यायवाची हैं इसमें तो किसी को कोई शक और संदेह नहीं होता l बीएमसी के गठन की कल्पना शहर को सुंदर और स्वच्छ बनाने के उद्देश्य से की गई थी इसमें भी कोई संदेह नहीं, पर बीएमसी के अधिकतर अधिकारियों का मूल उद्देश्य अपनी जिम्मेदारियों को पूरा करने से अधिक अपने व्यक्तिगत आकांक्षाओं को पूरा करने में होता है इसमें भी कोई संदेह नहीं, हालांकि अधिकारी अपने व्यक्तिगत आकांक्षाओं को पूरा करने में कुछ तो जिम्मेदारी का एहसास भी रखते है पर यह भी दुर्भाग्य है कि कुछ अधिकारियों के लिए व्यक्तिगत आकांक्षाऐ इतनी होती हैं जहां जिम्मेदारी नाम की कोई चीज भी नही होती ऐसे ही अधिकारियों से भरा पड़ा है मुंबई बीएमसी का के पश्चिम प्रभाग जहां शायद ही कोई अधिकारी ऐसा हो जो अपने कर्तव्यों के प्रति सचेत हो बल्कि यहां तैनात लगभग सारे अधिकारी अपनी तिजोरी भरने के लिए ही नौकरी करते हैं।
इसमें यहां पर तैनात लगभग सारे विभाग के जिम्मेदार अधिकारी शामिल हैं। कुछ अधिकारी जिन्हे बीएमसी का दबंग अधिकारी माना जाता है पर उनकी दबंगई अपने काम के प्रति नही दिखती बल्कि अपनी दबंगई अपने प्रभाव का प्रयोग यह अधिकारी अपनी व्यक्तिगत आकंचाओं को पूरा करने में ही दिखाते हैं।
इन अधिकारियों के सामने उनके ऊपर के पद पर बैठे अधिकारियों की कोई हैसियत नहीं है। अब जब पूरा के पश्चिम प्रभाग ही ऐसे अधिकारियों के हवाले है तो अंदाजा लगाया जा सकता है कि यहां पर अपने काम कराने के लिए आम लोगों को कितने पापड़ बेलने पड़ते होंगे। ऐसे महान अधिकारियों के कारण ही शायद आज के समय में बीएमसी के पश्चिम प्रभाग को भ्रष्टाचार का अड्डा न कहा जाए तो फिर क्या नाम दिया जाए।
के पश्चिम प्रभाग में शिकायतों का अंबार है पर शिकायतों पर कारवाई तो छोड़िए शिकायतों की जांच भी ढंग से हो जाए यही बड़ी बात है।
यह बात तो हो गई शिकायतों की आम आदमी अपने काम के लिए कितने धक्के खा रहा है यह वही जानता है बिना दलालों की सहायता के यहां पर कोई काम करा ले वह दुनिया का सबसे खुशनसीब इंसान होगा। कहने को बीएमसी ने आम लोगों का काम त्वरित गति से हो इसके लिए अधिकतर सिस्टम ऑनलाइन कर रखा है पर यदि ऑनलाइन सिस्टम से काम हो जाए तो अधिकारियों की जेब कैसे भरेगी इसलिए अधिकारियों ने अपने सिस्टम का ही जाल बना रखा है। हालांकि इन अधिकारियों के भ्रष्टाचार पर लगाम कसने के लिए भी सरकार ने एंटी करप्शन जैसे विभाग बना रखे हैं पर इन विभाग के अधिकारी भी शायद लंबी नींद सोए हुए हैं इसलिए यहां तैनात भ्रष्टाचारी अधिकारी भी चैन की बंसी बजा रहे है।