शहीद पत्रकार शशिकांत वारिशे की प्रथमपुण्यतिथि पर मराठी पत्रकार संघ मे स्मृति सभा का आयोजन
मुंबई : आज के पत्रकारों को अगर सच मे पत्रकारिता करनी हो तो मरने के लिए तैयार रहना चाहिए। एैसा वक्तव जुझारू विख्यात पत्रकार निखिल वागले ने पुण्यतिथि सभा मे पत्रकारों को संबोधित करते हुए मार्गदर्शन किया। गौरतलब हो की आज मुंबई मराठी पत्रकार संघ मे पिछले साल स्थानीय नेता के गुंडों की बेरहमी से की गई पिटाई मे जान गवाने वाले शहीद पत्रकार शशिकांत वारिशे की प्रथमपुण्यतिथि पर मराठी पत्रकार संघ मे स्मृति सभा का आयोजन सभा मे बोल रहे थे। उसे तो मरना ही था वो मर गया। पर क्या हम पत्रकार भाई उसकी हत्त्या के पीछे कौन मास्टर माइंड है इसका पता लगाने मे दिलचस्पी लिया क्या कल उसकी बारी थी आज यहाँ हम मे कोई भी हो सकता है गुंडों की गोलियों के शिकार।
उल्लेखनीय तौर पर महाराष्ट्र के बारसू सोल गांवों मे पिछले वर्ष शिवणे खु के ग्रामवासी रिफ़ाइनरी के विरोध मे उतरे सड़को पर प्रचंड जन आंदोलन कर राज्य सरकार से रिफ़ाइनरि को ताड़ीपार करने की मांग करने वाली जनता की खबर अपने अखबार मे प्रमुखता से छापकर शासन प्रशासन को ग्रामीण वासियों से अवगत करवाने वाले पत्रकार दिवंगत को स्थानीय विधायक द्वारा अपने गुंडों से लात घूँसों से पीटने के बाद महिंद्रा जीप से कुचल कर मार डालने का प्रयास किया! जिसका गंभीर हालत मे पीड़ित पत्रकार शशिकांत वारिसे की मौत हो जाती है !
परिणाम स्वरूप राज्य की एकनाथ शिंदे सरकार मे पत्रकारों पर बढ़ते हमले जहाँ कम होने का नाम नहीं ले रहे है ! वहीं शिंदे सरकार मे पत्रकार की हत्त्या ने पत्रकारों की राज्य मे सुरक्षा को लेकर कई सवाल खड़ा कर दिये है ! उपरोक्त अवसर पर मराठी पत्रकार संघ के अधक्षय नरेंद्र वि बोबडे सहित वरिष्ठ पत्रकार निखिल वाघले सहित इस पुण्यतिथि सभा मे पत्रकारों का मार्ग दर्शन कर श्रद्धांजलि सुमन अर्पित किये!