दिनाँक 26 दिसंबर 2023 को शाम 6 बजे से लाला मैदान में सीपीआई की स्थापना दिवस पर सभा.
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी का 98वां वर्षगाँठ मुंबई में बड़ी जोश ख़रोश के साथ मनाया गया. एक भव्य बाईक रैली चेंबूर श्रमिक ऑफिस से निकला जो चेंबूर नाका, वडाला, साईन कोलिवाड़ा, मटुंगा, दादर, परेल से होते हुए लालबाग सद्गुरु मैदान (लाल मैदान) पहुंचा जहाँ एक महती सभा हुई. इस बाईक रैली का नेतृत्व सीपीआई के वरिष्ठ नेता का. प्रकाश रेड्डी और सीपीआई मुंबई सचिव का. मिलिंद रनाडे कर रहे थे. लाल मैदान की सभा का अध्यक्षता कामरेड प्रकास बाबा सावंत ने किया संचालन का. चद्रकांत देसाई ने किया. वक्ता थे का. प्रकाश रेड्डी ने सीपीआई के लड़ाकू इतिहास को रखते हुए कहा की आजादी के लड़ाई में सभी कम्युनिस्ट लोग नैशनल कॉंग्रेस के अंदर ही गांधी जी के नेतृत्व में लड़ रहे थे, कलापानी के सेलूलर जेल में सबसे ज्यादा कम्युनिस्ट लोग ही थे. जब कॉंग्रेस पूर्ण स्वराज की मांग को नहीं उठा रहा था और भगत सिंह जेल हो गया तब जितने भी कम्युनिस्ट ग्रुप थे आज के ही दिन 1925 में कानपुर में जमा हुए और मौलाना हसरत मुहानी की सदारत में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी का गठन किया और अपने इसी पहली मीटिंग में ही भारत की पूर्ण स्वराज की मांग किया, जिसका समर्थन जेल से ही भगत सिंह ने किया. आजादी मिलते ही भगत सिंह के जितने साथी सभी ने सीपीआई में शामिल हो गए. आजादी के बाद तेलांगनाराज को भारत में मिलने के लिए कम्युनिस्टओं ने संघर्ष छेड़ दिया, वहीं गोवा मुक्ति आंदोलन और यहां संयुक्त महाराष्ट्र आंदोलन प्रमुख है. मुंबई में गरीबो के लिए घर देने का आंदोलन और गिरनी कामगारों की लड़ाई लड़ती रही. देश में अलग अलग जगह पर भूमिहीन को जमीन दिलाने लड़ाई लड़ी, शिक्षा और रोज़गार की लड़ाई लड़ती रही. सरकार में जा कर RTI, RTE, NREG जैसे गरीबों के लिए कानून बनवाए, बैंक राष्ट्रीयकरन और जमीनदारी उन्मूलन जैसे गरीब पक्षीय कानून बनवाए. साम्प्रदायिकता और जातिवाद के खिलाफ लड़ाई में चैम्पियन रही. वही दूसरा वक्ता कामरेड सुकुमार दामले ने कहा की सीपीआई के गठन से पहले आयटक गठन हो चुका था और कम्युनिस्ट लोग उसमें मजदूरों के अधिकार के लड़ाई के साथ साथ आजादी की लड़ाई लड़ रहा था उस वक़्त का बड़ी बड़ी इंडस्ट्रियल हड़ताल भारत के साथ इंग्लेंड में और कई देश में भी कराया जहाँ अंग्रेजो की सरकार थी. इसका उदाहरण मुंबई में नाविक हड़ताल. मोदी सरकार को समझ नहीं इनके लोग अनपढ़ है, मजदूरों ने और आयटक ने अलग अलग समय पर मजदूरों की संरक्षण के लिए 29 कानून बनावाए थे उसे कोविड के आर में पूंजीपतियों के फायदे के लिए 4 कानून बना दिया. मोदी जिसे गुजरात मे फेकु कहता है वह फेकु ने किया विकास के नाम पर सभी सरकारी कम्पनिया अदानी और अम्बानी को दे रहा है. यह अदानी अम्बानी का दलाल बन कर काम कर रहा है, इसे हर साल दो करोड़ रोजगार की बात किया था लेकिन हर जगह छटनी हो रहा है, कहीं कहीं अल्पसमय के लिए कॉन्ट्रैक्ट पर बहाली होती है जिस कामगारों का भविष्य की कोई गारन्टी नहीं है. का दामले ने कहा की इंडिया आघाड़ी बन चुका है अभी से लग कर 2024 में बीजेपी और मोदी को हटाना है और इंडिया को जीतना है.
का बबली रावत ने महिलाओं की बात रखते हुए कहा की मोदी सरकार में महिला सुरक्षित नहीं है, पहलवान बेटी साक्षी मलिक को रोते हुए कुस्ती छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा, लेकिन पहलवान बेटियों का यौन शोषण करने वाले बृज भूषण सिंह को सरकार बचाती रही, बिलकिस बानो के रेपिस्ट को छोड़ा गया और फूल माला से स्वागत किया गया. हाथरस हो या उत्तराखंड वहां बेटी को न्याय नहीं मिला. लाखों आंगनबाड़ी सेविका, आशाकर्मी, जीविका बहिन महीनों हड़ताल पर रही. क्या मोदी वह भारत की बेटी नहीं है.
सीपीआई मुंबई सचिव मिलिंद रनाडे ने कहा की मोदी सरकार तानाशाह हो गई है जब पार्लियामेंट में बेरोजगार नौजवानों ने कुदी मारा इस पर सुरक्षा का सवाल उठाने वाले विपक्ष के 146 खासदार को निलंबित कर दिया और मनमानी ढंग से कई बिल पास करा लिया जो निंदनीय है. पहलवान बेटी साक्षी ने जब रोते हुए कुस्ती छोड़ने की घोषणा की तो हरामखोर बीजेपी और आरएसएस के लोग पहलवान बेटी पर ही सोशल मीडिया में भद्दा भद्दा पोस्ट डालने लगे. सरकार ने हर कोशिश किया की ब्रिज भूषण को बचाने की. इसी लाल झंडे की लड़ाई की ताकत से आज 4500 सफाई मजदूरों को परमानेंट करवाया है इसलिए सीपीआई का लड़ाकू इतिहास रहा है. अब 2024 में मोदी और भाजपा सरकार को हटाने के लिए इंडिया गठबंधन बना है, इसे हर गली मोहल्ला में ले जाना है.